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बृहत्संहिता • अध्याय 48 • श्लोक 40
सहां च सहदेवीं च पूर्णकोशां शतावरीम्। अरिष्टिकां शिवां भद्रां तेषु कुम्भेषु ब्राह्मी क्षेमामर्जा चैव सर्वबीजानि मङ्गल्यानि यथालाभं सर्वोषध्यो विन्यसेत् ॥
समद्रा ( रक्तमशिष्ठा पसरन), विजया (भंग), सहा (मुद्भषणों बनमूड़), सहदेवी (सहदेई), पूर्णकोशा (नागरमोथा), शतावरी, अरिहिका (रोठा), शिया (शमी), भद्रा (बला)-इन औषधियों को पूर्व स्थापित चारो कालगों में डाल दे।
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