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बृहत्संहिता • अध्याय 48 • श्लोक 4
श्लेष्मातकाक्षकण्टकिकटुतिक्तविगन्धिपादपविहीने । कौशिकगृध्रप्रभृतिभिरनिष्टविहगैः परित्यक्ते ॥
श्लेष्मातक (लसौड़ा), अक्ष (बहेड़ा), कण्टक (खैर आदि), कटु, तिक्त (निम्बू आदि) और दुर्गन्धियुत वृक्षों से रहित, उल्लू, गिद्ध आदि अशुभकारक पक्षियों से रहित,
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