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बृहत्संहिता • अध्याय 48 • श्लोक 38
पुष्यस्नानविमिश्रेणापूर्णानम्भसा पुष्यस्नानद्रव्याण्यादद्याद् सरलांश्च । गर्गगीतानि ॥
उनको पुष्यस्नान की ओषधियों से मिश्रित जल से, रत्नों से और गर्ग महर्षि के द्वारा प्रतिपादित पुष्यस्नान के द्रव्यों से परिपूर्ण करे।
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