मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
बृहत्संहिता • अध्याय 48 • श्लोक 36
सघृतस्य पायसस्य च तत्र शरावाणि तैश्च सम्भारैः । पश्चिमवेद्यां पूजां कुर्यात् स्नानस्य सा वेदी ॥
इस सामग्री में प्रत्येक के साथ- साथ घृत और खीर का राराष (मिट्टी का पात्र) देवे। इनसे वेदी के पक्षिम, भाग में पूरा करे, क्योंकि यह पुष्यस्नान की येदी होती है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
बृहत्संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

बृहत्संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें