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बृहत्संहिता • अध्याय 48 • श्लोक 35
लाजाज्याक्षतदधिमधुसिद्धार्थकगन्यसुमनसो धूपः । गोरोचनाञ्जनतिलाः स्वर्तुजमधुराणि च फलानि ॥
खीर, घृत, अक्षत, दधि, मनु, सरसों, सुगन्ध द्रव्य, पुष्प, धूप, गोरोचन, कज्जल, तिल, स्व ऋतु के उत्पत्र मधुर फल-यह सामग्री है।
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