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बृहत्संहिता • अध्याय 48 • श्लोक 34
मण्डलपश्चिमभागे कृत्वाग्निं दक्षिणेऽथवा वेद्याम् । आदद्यात् सम्भारान् दर्भान् दीर्घानगर्भाश्च ॥
मण्डल के पश्चिम या दक्षिण भाग में वेदी बना कर उस पर अग्निस्थापन करके सामग्रियों को एकत्रित करे। लम्बे, अच्छिन्न और गर्भरहित कुशाओं को लावे ।
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