मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
बृहत्संहिता • अध्याय 48 • श्लोक 32
धूपाज्याहुतिमाल्यैर्विबुधान् रत्नैः स्तुतिप्रणामैश्च । गन्धर्वानप्सरसो गन्धैर्माल्यैश्च सुसुगन्यैः ॥
धूप और मालासों से मुनियों कौ; अश्लेषक (अमिश्रित) वर्ण और जिमधुर (मधु, पूत और शर्करा) से सों की; धूप, घृत, हवन, माला, रत्न, स्तीत्र और प्रणामों से देवताओं की, सुगन्य द्रव्य, माला और सुन्दर गन्धों से गन्धर्व तथा अप्परराओं की एवं समस्त वर्णपुत वलियों
पूरा ग्रंथ पढ़ें
बृहत्संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

बृहत्संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें