धूप और मालासों से मुनियों कौ; अश्लेषक (अमिश्रित) वर्ण और जिमधुर (मधु, पूत और शर्करा) से सों की;
धूप, घृत, हवन, माला, रत्न, स्तीत्र और प्रणामों से देवताओं की, सुगन्य द्रव्य, माला
और सुन्दर गन्धों से गन्धर्व तथा अप्परराओं की एवं समस्त वर्णपुत वलियों
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