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बृहत्संहिता • अध्याय 48 • श्लोक 31
सामयजुर्भिर्मुनयस्त्वृग्भिर्गन्यैचैश्च धूपमाल्ययुतैः । अश्लेषकवर्णखिमधुरेण चाभ्यर्चयेद् नागान् ॥
अभ्यञ्जन (स्निग्ध पदार्थ), वाग्जल, तिल, मांस और भात से पितरों को; साम तया यजुर्वेदों के मन्त्र, सुमन्य द्रव्य, धूप और मालासों से मुनियों कौ; अश्लेषक (अमिश्रित) वर्ण और जिमधुर (मधु, पूत और शर्करा) से सों की;
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