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बृहत्संहिता • अध्याय 48 • श्लोक 30
मांसौदनमद्याद्यैः पिशाचदितितनयदानवाः पूज्याः । अभ्यञ्जनाञ्जनतिलैः पितरो मांसौदनैश्चापि ॥
उसी तरह यहाँ पर भी ग्रहों की पूजा करनी चाहिये। मांस, भाउ, मद्य आदि से पिशाच, दैत्य और दानवों की पूजा करनी चाहिये।
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