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बृहत्संहिता • अध्याय 48 • श्लोक 3
पुष्यस्नानं नृपतेः कर्तव्यं दैववित्पुरोधाभ्याम् । नातः परं पवित्रं सर्वोत्पातान्तकरमस्ति ॥
ज्यौतिषि और पुरोहित के द्वारा राजा को पुष्य स्नान कराना चाहिये। इससे अधिक पवित्र और सभी उत्पातों को नाश करने बाला दूसरा कोई उपाय नहीं है।
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