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बृहत्संहिता • अध्याय 48 • श्लोक 29
कथयाम्यतः परमहं पूजामस्मिन् यथाभिलिखितानाम् । ग्रहयज्ञे यः प्रोक्तो विधिर्ब्रहाणां स कर्तव्यः ॥
इसके बाद इस यज्ञ में अभीष्ट देवताओं की पूजन विधि बताते हैं। पात्रा नामक पुस्तक के ग्रहयज्ञ प्रकरण में ग्रहों की पूजन विधि जो बताई गई है,
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