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बृहत्संहिता • अध्याय 48 • श्लोक 28
भक्ष्यैरन्त्रैश्च विविधैः फलमूलामिषैस्तथा । पानैश्च विविधैर्हचैः सुराक्षीरासवादिभिः ॥
माला, चन्दन, भोज्यान, नाना प्रकार के फल, मूल, मांस, नाना प्रकार के चित्ताहादक पान पस्तु, मद्य, दुग्ध, आसव आदि से पूजा करे।
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