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बृहत्संहिता • अध्याय 48 • श्लोक 27
वर्णकैर्विविर्यः कृत्वा हद्यैर्गन्धगुणान्वितैः । यथास्वं पूजयेद्विद्वान् गन्यमाल्यानुलेपनैः ॥
ब्राह्मी आदि माताओं के साथ स्ट्र कार्तिकेय, विष्णु, विशाखा, लोकपाल और देवताओं की स्त्री (इन्द्राणी, गौरी, लक्ष्मी आदि) को मन को प्ररात्र करने वाली सुगन्धियों से युक्त नाना प्रकार के वणों से बना कर विद्वान् मुगन्धित द्रव्य,
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