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बृहत्संहिता • अध्याय 48 • श्लोक 25
पुरोहितो यथास्थानं नागान् यक्षान् सुरान् पितृन् । गन्धर्वाप्सरसचैव मुनीन् सिद्धांश्च विन्यसेत् ॥
बाद में पुरोहित प्राधान्य क्रम से नाग, यक्ष, देव, पितर, गन्धर्व, अप्सरा, मुनि और सिद्धों की स्थापना को तथा अधिनी आदि सब नक्षत्रों के साथ ग्रह, ब्राह्मी आदि
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