तस्मिन् मण्डलमालिख्य कल्पयेत्तत्र मेदिनीम्। नानारत्नाकरवतीं स्थानानि विविधानि च ॥
पूर्वोक्त शुभ लक्षणपुत भूप्रदेश में एक मण्डल बनाकर अनेक प्रकार के रत्नों के समुदाय से युत पृथ्वी की और बहुत तरह के स्थानों की कल्पना करे।
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