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बृहत्संहिता • अध्याय 48 • श्लोक 2
या व्याख्याता शान्तिः स्वयम्भुवा सुरगुरोर्महेन्द्रार्थे । तां प्राप्य वृद्धगर्गः प्राह यथा भागुरः शृणुत ॥
जो शान्ति इन्द्र के लिये ब्रह्माजी ने बृहस्पति से कही थी, उसी को पाकर वृद्धगर्गाचार्य ने भागुरि से जिस तरह कही, उसी तरह उस शान्ति को सुनो।
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