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बृहत्संहिता • अध्याय 48 • श्लोक 19
लाजाक्षतदधिकुसुमैः प्रयतः प्रणतः पुरोहितः कुर्यात् । आवाहनमथ मन्त्रस्तस्मिन् मुनिभिः समुद्दिष्टः ॥
नम्र होकर पुरोहित को खोर, अक्षत, दधि और पुष्यों के द्वारा बलि देनी चाहिये इसके बाद मुनियों द्वारा कथित आवाहन मन्त्र पढ़ना चाहिये ।
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