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बृहत्संहिता • अध्याय 48 • श्लोक 17
धात्री घना सुगन्धा स्निग्धा मधुरा समा च विजयाय । सेनावासेऽप्येवं योजयितव्या यथायोगम् ॥
अन्तःसार बाली, सुगन्धयुत, निर्मल, मधुर और समभूमि विजय के लिए होती है। सेनाओं के निवास के लिए भी पूर्वोक्त भूमि युक्तिपूर्वक प्रयोग करनी चाहिये।
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