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बृहत्संहिता • अध्याय 48 • श्लोक 15
पुण्येष्वायतनेषु च तीर्थेषूद्यानरम्यदेशेषु । पूर्वोदक्प्लवभूमौ प्रदक्षिणाम्भोवहायां च ॥
अथवा पवित्र देवस्थान, तीर्थ, जलाशय, उपवन, सुन्दर देश, पूर्व या उत्तर तरफ नोचो भूमि पर प्रदक्षिण क्रम से जहाँ जल बहता हो, ऐसे स्थान में पुष्यस्नान कराना चाहिये ।
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