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बृहत्संहिता • अध्याय 48 • श्लोक 11
कुर्याद् गोरोमन्यजफेनलवशकृत्खुर क्षतोपचिते । अचिरप्रसूतहुङ्‌कृतवल्गितवत्मोत्सवे गोष्ठे ॥
गायों के जुगाली करने से गिरे हुये फेन और गोबर खुरों से ताडित जहाँ पर हो तथा उत्पन हुए बछड़ों के हुङ्कार और कूदना फाँदना रूप उत्सवयुत गोष्ठ स्थान में पुष्यस्नान करना चाहिये।
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