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बृहत्संहिता • अध्याय 48 • श्लोक 10
प्रोत्फुल्लकमलवदनाः कलहंसकलप्रभाषिण्यः । प्रोत्तुङ्गकुड्लमकुचा यस्मिन्नलिनीविलासिन्यः ॥
खिले हुए कमलरूप मुख वाली, राजहंस के मधुर शब्दरूप वाक्य वाली और कमल के कली रूप ऊँचे स्तन वाली पुष्करिणी रूप त्री के जंचा (तट) पर पुष्य- स्नान करना चाहिये।
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