इस संसार में प्रजारूप वृक्ष का मूल स्वरूप राजा है। यतः उस राजा का विषात होने से प्रजाओं का अशुभ और संस्कार से शुभ होता है; अतः राजा के शुभवृद्धि के लिये चिन्ता करनी चाहिये ।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
बृहत्संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
बृहत्संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।