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बृहत्संहिता • अध्याय 47 • श्लोक 7
प्राच्यां चेद् ध्वजवदयस्थिता दिनान्ते प्राच्यानां भवति हि विप्रहो नृपाणाम् । मध्ये चेद् भवति हि मध्यदेशपीडा रूखैस्तैर्न तु रुचिमन्मयूखवद्भिः ॥
यदि सन्ध्या समय में चन्द्र आदि ग्रह ध्वज की तरह पूर्व दिशा में दिखाई दें तो पूर्व दिशा में स्थित राजाओं में परस्पर विग्रह होता है तथा आकाश-मध्य में स्थित हो तो मध्य देश में पीडा होती है। पर इन चन्द्र आदि ग्रहों के रूखे रहने पर ही यह फल प्राप्त होता है। यदि निर्मल सुन्दर किरण पाले हो तो नहीं अर्थात् पूर्व दिशा या मध्य देश को पीड़ित नहीं करते हैं।
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