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बृहत्संहिता • अध्याय 47 • श्लोक 5
कोष्ठागारगते भृगुपुत्रे पुष्यस्थे च गिराम्प्रभविष्णो । निर्वैराः क्षितिपाः सुखभाजः संहष्टाच जना गतरोगाः ॥
यदि कोष्ठागार ( मघा नक्षत्र) में शुक्र और पुष्य नक्षत्र में बृहस्पति स्थित हो तो राजा लोग पारस्परिक द्वेषरहित और सुखी होते हैं तथा प्रजागण प्रसत्र और रोगरहित होते है।
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