पुनरुक्त फेल होने से ही इस मयूरचित्रक का निश्चित स्वरूप ज्ञात होगा अर्थात् पूर्व फल-कथन के अतिरिक्त पुनः यहाँ पर मयूरचित्रक का सम्बन्ध लेकर उसी फल का वर्णन कर देना ही उसका स्वरूप है; अत: फिर नहीं कहने से भी मेरी निन्दा होगी ।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
बृहत्संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
बृहत्संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।