शस्ता शान्तद्विजमृगपुष्टा सन्ध्या स्निग्धा मृदुपवना च । पांशुध्वस्ता जनपदनाशं धत्ते रूक्षा रुधिरनिभा वा ॥
यदि सन्ध्याकाल में सूर्य के विरुद्ध दिशा में मुख करके पक्षीगण और जङ्गली पशु- मधुर शब्द करें तथा निर्मल थोड़ी वायु चले तो शुभ होता है। यदि पूलियों से
गण व्याप्त, रूक्ष और लोहित वर्ण की सन्ध्या दिखाई दे तो देशों का नाश होता है।
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