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बृहत्संहिता • अध्याय 47 • श्लोक 24
अच्छिन्नः परिषो वियच्च विमलं श्यामा मयूखा रवेः स्निग्धा दीचितयः मितं सुरयनुर्विद्युच्च पूर्वोतरा। स्निग्धो मेघतरुर्दिवाकरकरैरालिङ्गितो या यदा वृष्टिः स्याद्यदि वाऽर्कगस्तसमये मेधो महान् छादयेत् ॥
अखण्डित परिष, निर्मल आकाश, सूर्य को श्याम वर्ग किरणें, स्विच दीधिति, ब्रेड वर्ग के इन्द्रधनुष, पूर्वोतरा विद्युत् और स्निग्ध या सूर्य के किरणों में व्याप्त मेघवृध हो तो वर्षा होती है अथवा यदि सायंकाल में बहुत बड़ा मेभ सूर्यविम्भ को आदत करे जो भी मुहि होती है।
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