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बृहत्संहिता • अध्याय 47 • श्लोक 23
तस्मिन् सन्ध्याकाले चिह्नरेतैः शुभाशुभं वाच्यम् । सर्वेरतैः स्निग्यैः सद्यो वर्ष भयं सीः ॥
इस सध्या समय में वक्ष्यमाणचिकेद्वारा सुभाशुभ फल कहना चाहिये, जैसे कि समस्त अवकाशस्थित विम्बगण स्निग्ध हों तो शीघ्र मर्षा और रूखे हों तो भय उत्पन होता है।
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