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बृहत्संहिता • अध्याय 47 • श्लोक 22
अर्धास्तमयात् सख्या व्यक्तीभूता न तारका यावत् । तेजः परिहानिमुखाद्भानोरघर्योदयो यावत् ॥
अर्धास्त सूर्यबिम्ब के अनन्तर स्पष्ट रूप से ताराओं को दिखाई देने तक पश्विमा सन्ध्या और कराओं के प्रकाराहानि के समय से अधोदित सूर्यबिम्ब फाल तक प्राक् सन्ध्या होती है।
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