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बृहत्संहिता • अध्याय 47 • श्लोक 20
परिघ इति मेघरेखा या तिर्यग्भास्करोदयेऽस्ते वा। परिधिंस्तु प्रतिसूयों दण्डस्त्वृजुरिन्द्रचापनिभः ॥
सूर्य के उदय या अस्त समय में तिरछी येप की रेखा 'परिच' संज्ञक, प्रतिसूर्य 'परिधि' संज्ञक और स्पष्ट इन्द्रधुं के समान रेखा 'दण्ड' संज्ञक होती है
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