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बृहत्संहिता • अध्याय 47 • श्लोक 16
उदयति सततं यदा शिखी चरति भचक्रमशेषमेव वा। अनुभवति पुराकृतं तदा फलमशुभं सचराचरं जगत् ॥
जिस समय केतु सदा दिखाई दे या सम्पूर्ण नक्षत्रमण्डल में विचरण करे, उस समय चराचर के साथ सम्पूर्ण जगत् बराबर किये हुये पूर्वर्जित अशुभ फलों का अनुभव करता है।
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