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बृहत्संहिता • अध्याय 47 • श्लोक 15
रोहिणीशकटमर्कनन्दनो यदि भिनत्ति रुधिरोऽथवा शिखी। किं वदामि यदनिष्टसागरे जगदशेषमुपयाति संक्षयम् ॥
यदि रोहिणी शकट को शनि, मंगल या केतु भेदन करे तो अधिक क्या कहा जाय, सम्पूर्ण विश्व ही अनिष्ट सागर में पड़ कर नष्ट हो जाता है, अर्थात् उस समय अमंगल ही अमङ्गल चारो तरफ दिखाई देते हैं।
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