प्राग्द्वारेषु चरन् रविपुत्रो नक्षत्रेषु करोति च वक्रम्। दुर्भिक्षं कुरुते महदुषं मित्राणां च विरोधमवृष्टिम् ॥
यदि शनि प्राण्द्वार (कृत्तिका आदि सात नक्षत्रों) में विचरण करते हुये वाळी हो जाय तो दुर्भिक्ष, मित्रों में अत्यधिक विरोध और अवृष्टि करता है।
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