यदि केतु सप्तर्षि मण्डल, अभिजित् नक्षत्र, ध्रुवतारा या ज्येष्ठा नक्षत्र को स्पर्श करे तो मेषों का नाश, अमङ्गल, कर्मों की हानि और शोक देने वाला होता है। यदि आश्लेषा नक्षत्र को स्पर्श करे तो निश्वय ही वृष्टि का नाश और क्षुधा-पिपासा आदि से पीड़ित बालकों को साथ लेकर लोग यहाँ से चल कर नष्ट होते हैं।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
बृहत्संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
बृहत्संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।