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बृहत्संहिता • अध्याय 47 • श्लोक 10
नक्षत्राणां तारकाः सग्रहाणां घूमज्वालाविस्फुलिङ्गान्विताश्चेत्। आलोकं वा निर्निमित्तं न यान्ति याति ध्वंसं सर्वलोकः सभूपः ॥
यदि ग्रह और नक्षत्रों के तारे घूमज्याला या अग्निकणों से व्याप्त या विना कारण प्रकाशरहित दिखाई दें तो उस देश में (ग्रहभक्ति या कूर्म विभाग में कथित उस ग्रह या नक्षत्र के देश में) स्थित राजा के साथ-साथ सब प्रजाओं का भी नाश होता है।
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