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बृहत्संहिता • अध्याय 46 • श्लोक 98
उत्पातान् गणितविवर्जितोऽपि बुद्ध्वा विख्यातो भवति नरेन्द्रवल्लभच । एतत्तन्मुनिवचनं रहस्यमुक्तं यज्ज्ञात्वा भवति नरखिकालदर्शी ॥
गणित को नहीं जानने वाले मनुष्य भी पूर्वोक्त उत्पातों को जान कर यशस्वी और राजा के प्रिय होते हैं। यह मुनि का बचन गोपनीय कहा गया है, जिसको जान कर मनुष्य त्रिकालदशों होता है।
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