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बृहत्संहिता • अध्याय 46 • श्लोक 97
पूर्व चरति देवेषु पश्चाच्चरति नाचोदिता वाग्वदति सत्या होषा मानुषान् । सरस्वती ॥
विना प्रेरणा के नहीं बोलने वाली यह सत्यरूप सरस्वती पहले देवताओं में विचरण करती थी, बाद में मनुष्यों को प्राप्त हुई।
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