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बृहत्संहिता • अध्याय 46 • श्लोक 94
हिमपातानिलोत्पाता ি विरूपाद्भुतदर्शनम् । तारोल्कापातपिञ्जरम् ।।
हिमपात, वायुसम्बन्धी उत्पात, भयानक प्राणियों का आश्चर्य करने वाला दर्शन, काले अञ्जन की तरह रात और उल्कापात से पीला आकाश, रित्रयों के गर्भ से नाना प्रकार के
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