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बृहत्संहिता • अध्याय 46 • श्लोक 92
शीतानिलतुषारत्वं नर्दनं मृगपक्षिणाम् । रक्षोयक्षादिसत्वानां दर्शनं दिशो पूमान्यकाराच यागमानुषी ॥
मायु तथा तुषार (बर्फ) में उण्यापन, मृग और पक्षियों का शब्द, राक्षस, यच आदि शानियों का दर्शन, मनुष्य के विना नाणी, अन्धकारमुत आकाश
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