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बृहत्संहिता • अध्याय 46 • श्लोक 91
गीतवादिननिधर्घोषा वनपर्वतसानुषु । सस्यवृद्धिरपां हानिरपापाः शरदि स्मृताः ॥
गीत और वाद्यों की ध्वनि, धान्य की वृद्धि और जल की हानि-ये सब शरद् ऋतु में अपाप (शुभ) हैं।
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