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बृहत्संहिता • अध्याय 46 • श्लोक 9
दैवतयात्राशंकटाक्षचक्रयुगकेतुभङ्गपतनानि । सम्पर्यासनसादनसङ्गश्च न देशनृपशुभदाः ॥
देवस्थानों में यात्रा के समय गाड़ी की धुरी, पहिया, युग (जुआ) या ध्वजा का भद्र होना, गिरना, उलटना, सादन या कहीं पर चिपट जाना देश और राजा के लिये शुभकारी नहीं है।
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