हमेभ्योऽ अरसस्नेहबहुपुष्यफलोद्रमाः । गोपक्षिमदवृद्धिध शिवाय मधुमाधवे ॥
मधुरादि रस और तेल आदि को उत्पत्ति, गाय और पक्षियों में काम की वृद्धि- ये सब उत्पात चैत्र और वैशाख मास में कल्याण के लिये होते हैं।
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