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बृहत्संहिता • अध्याय 46 • श्लोक 84
वज्राशनिमहीकम्पसन्ध्यानिर्घातनिः स्वनाः । परिवेषरजोधूमरक्तार्कास्तमयोदयाः ॥
बज्र (बिजली), अशनि (पत्थरों की वर्षा या उल्कापात), भूकम्प, दीप्ता, सन्ध्या, निर्घात, शब्द, सूर्य-चन्द्र का परिवेष, धूली, धूम, रक्त वर्ष के रवि का उदयास्त, पृक्षों से भोजन,
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