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बृहत्संहिता • अध्याय 46 • श्लोक 82
नरपतिदेशविनाशे केतोरुदयेऽथवा प्रहेऽर्केन्द्रोः । उत्पातानां प्रभवः स्वर्तुभव चाप्यदोषाय ॥
राजा के विनाश, देश के ऊपर आपत्ति, केतु के उदय और सूर्य, चन्द्र के ग्रहण के समय उत्पत्र उत्पात तथा आगे कथित की तरह अपने ऋतु में उत्पत्र उत्पात दोष के लिये नहीं होते हैं।
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