महाशान्योऽथ बलयो भोज्यानि सुमहान्ति च।
कारयेत महेन्द्रं च माहेन्द्रों च समर्चयेत् ॥
पूर्वोक्त उत्पातों को अधिक शान्ति करनी चाहिये। बलि और अधिक भोज्य करना
चाहिये तथा इन्द्र और इन्द्राणी का अधिक पूजन करना चाहिये ।
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