शिवलिङ्ग, देवमूर्ति और देवस्थानों का विना कारण फटना, कम्पन होना, उनमें पसीना आना, उनका रोना, गिरना, उनमें शब्द होना आदि (उनका वमन करना और डिसकना) राजा और देश के नाश के लिये होता है।
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