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बृहत्संहिता • अध्याय 46 • श्लोक 75
सन्ध्याद्वयस्य दीप्तिघूमोत्पत्तिश्च काननेऽ नग्नौ । छिद्राभावे भूमेर्दरणं कम्पश्च भयकारी ॥
दोनों सन्ध्याओं में तेज का होना, वन या अग्निरहित स्थान में घूम की उत्पत्ति होना, छिद्राभाव वाली भूमि का फट जाना या कम्पन होना भयकारी होता है।
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