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बृहत्संहिता • अध्याय 46 • श्लोक 72
मृगपक्षिविकारेषु कुर्याद्धीमान् देवाः कपोत इति च जप्तव्याः सुदेवा इति चैकेन देया गावः सदक्षिणान् । पञ्चभिर्द्विजैः ॥
मृग और पक्षियों में पूर्वोक्त विकार होने पर दक्षिणा के साथ हवन करे, पाँच ब्राह्मणों के द्वारा 'देवाः कपोत' इत्यादि मन्त्र का तथा एक ब्राह्मण के द्वारा
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