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बृहत्संहिता • अध्याय 46 • श्लोक 70
गृहचैत्यतोरणेषु द्वारेषु च पक्षिसङ्घसम्पातः। मधुवल्मीकाम्भोरुहसमुद्धवश्चापि नाशाय ॥
घर, प्रधान वृक्ष, तोरण (पुरद्वार) या गृहद्वार पर पक्षियों के समुदायों का गिरना तथा इन्हीं पर आदि पर मधु (शहद) का छत्ता, मल्मोक (पमई) और कमलों की उत्पत्ति नाश के लिये होती है।
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