आत्मसुतकोशवाहनपुरदारपुरोहिरेषु लोके च ।
पाकमुपयाति दैवं परिकल्पितमष्टया नृपतेः ॥
अपना शरीर, पुत्र, खजाना, वाहन, नगर, खी, पुरोहित, जनपद- इन आठों में राजा दैव-कल्पित उत्पातों का फल प्राप्त करता है।
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